Philosophy Shayari In Hindi
उठो अब ए गौतम समाधि को छोडो !
उतर आओ ईसा सलीबों को तोड़ो
अब आओ मोहम्मद कहो फिर से कुरआं
के फिर से मोहब्बत को भूली है इंसा
अब आओ ए नानक निगहबान बन कर
चले आओ अब तो हिमालय से शंकर
की फिर ज़हर क़ो इस ज़मीं से मिटाओ
ओ पीरों फ़क़ीरों सभी लौट आओ
अब इक साथ सबको मोहब्बत सिखाओ।
हे माधव! अभी मत बंसी बाजओ,
अभी सर्फ हमको ये हासिल नहीं है,
उठो हमसफ़ीरों ये मंजिल नहीं है,
रूप की धूप कहाँ जाती है मालूम नहीं
शाम किस तरह उतर आती है रुख़्सारों पर
अपने होने का कुछ एहसास न होने से हुआ
ख़ुद से मिलना मिरा इक शख़्स के खोने से हुआ
ऐसी तारीकियाँ आँखों में बसी हैं कि 'फ़राज़'
रात तो रात है हम दिन को जलाते हैं चराग़
मुझे तो लगता है जैसे ये काएनात तमाम
है बाज़गश्त यक़ीनन सदा किसी की नहीं
ऐसी तारीकियाँ आँखों में बसी हैं कि 'फ़राज़'
रात तो रात है हम दिन को जलाते हैं चराग़
न इब्तिदा की ख़बर है न इंतिहा मालूम
रहा ये वहम कि हम हैं सो वो भी क्या मालूम
कभी ऐ हक़ीक़त-ए-मुंतज़र नज़र आ लिबास-ए-मजाज़ में
कि हज़ारों सज्दे तड़प रहे हैं मिरी जबीन-ए-नियाज़ में
लम्हों के अज़ाब सह रहा हूँ
मैं अपने वजूद की सज़ा हूँ
रूप की धूप कहाँ जाती है मालूम नहीं
शाम किस तरह उतर आती है रुख़्सारों पर
धोका है इक फ़रेब है मंज़िल का हर ख़याल
सच पूछिए तो सारा सफ़र वापसी का है
गर जोश पे टुक आया दरियाव तबीअत का
हम तुम को दिखा देंगे फैलाव तबीअत का
बुतों को पूजने वालों को क्यूँ इल्ज़ाम देते हो
डरो उस से कि जिस ने उन को इस क़ाबिल बनाया है
जाने कितने लोग शामिल थे मिरी तख़्लीक़ में
मैं तो बस अल्फ़ाज़ में था शाएरी में कौन था
मैं भी यहाँ हूँ इस की शहादत में किस को लाऊँ
मुश्किल ये है कि आप हूँ अपनी नज़ीर मैं
किसी के काम न आये तो आदमी क्या है?
जो अपनी फ़िक्र में गुज़रे वो ज़िंदगी क्या है?
इंसान हो किसी भी सदी का कहीं का हो
ये जब उठा ज़मीर की आवाज़ से उठा
जो दर्द मे वाकिफ़ हैं वो ख़ूब समझते हैं
राहत में तुझे खोया तकलीफ़ में पाया है
करते फिरते हो अँधेरे की शिकायत 'दर्शन'
दिल की दुनिया में कोई दीप जलाओ तो सही
आपका मक़सद पुराना है मगर ख़ंजर नया
मेरी मजबूरी है यह, लाऊं कहां से सर नया
लाख बेजान सही उसका भी मन दुखता है
खून नाहक हो तो ख़ंजर का बदन दुखता है
हर वक़्त खिलते फूल की जानिब तका न कर
मुरझा के पत्तियों को बिखरते हुए भी देख
तिरे वजूद में कुछ है जो इस ज़मीं का नहीं
तिरे ख़याल की रंगत भी आसमानी है